मैं गरीब हूँ, बेकार हूँ, आप लोग मुझे किस लिए मिलने आये हो? --साहेब कांशी राम. बंगा -नवांशहर ( पंमी लालोमज़ारा ) पंजाब :- बात है फरवरी 2002 की. महाराष्ट्र के शहर सोलापुर के एक गेस्ट हाउस में साहेब की एक मीटिंग चल रही थी. इस दौरान 20-25 के करीब आई.पी.एस., आई.ए.एस, और आई,ऍफ़.एस. अफसर साहेब को मिलने पहुँच गए. साहेब ने डॉ. सुरेश माने को कहा कि ‘इन्हें कहो कि बाहर बरामदे में बैठकर इंतज़ार करें, मुझे अभी आधा घंटा लगेगा.’ इसके 15 मिनट बाद ही सोलापुर रेलवे स्टेशन के करीब 30-40 कुली भी मिलने आ पहुँचे. साहेब ने उन्हें भी इंतज़ार करने के लिए कहा. जब आधा घंटा हुआ तो साहेब ने डॉ. माने को कहा, ‘बाहर जो लोग मिलने के लिए बैठे हैं, उन्हें बुलाइए. डॉ. माने ने कहा, ‘साहेब जी, पहले किसे बुलाऊँ? कुलियों को या ब्यूरोक्रेट्स को? साहेब ने कहा, ‘पहले कुलियों को बुलाओ. वह मजदूर लोग हैं. वे कौन सा कोई वेतन लेते हैं. काम करते है, सो अपना परिवार पालते हैं.’ बहरहाल, एक एक करके सभी कुली अन्दर आ गए और आदरभाव से चरण स्पर्श करके एक साथ खड़े हो गए. साहेब के साथ केरला के कर्नल विश्वनाथन भी बैठे हुए थे. साहेब ने...