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मैं पढ़े लिखे लोगों को पढ़ाता हूँ, बस यही मेरी योग्यता है -साहिब कांशी राम.

मैं पढ़े लिखे लोगों को पढ़ाता हूँ, बस यही मेरी योग्यता है -साहिब कांशी राम. बंगा -नवांशहर ( पंमी लालोमज़ारा ) पंजाब :- बात 1983 की पुणे (महाराष्ट्र) की है. साहेब एक कैडर कैंप को संबोधित कर रहे थे. कैडर कैंप में केवल आई.पी.एस, आई.ए.एस, आई.ऍफ़.एस और आई.एस.आर से संबंधित अफसर ही थे. वहीँ से कहीं डॉक्टरों की स्वास्थ्य विभाग से संबंधित सर्वे करने वाली टीम गुज़र रही थी. वहीँ पर मौजूद कुछ नौजवानों से डॉक्टरों की उस टीम ने उत्सुकतावश पूछा कि यहाँ क्या हो रहा है?
तो आगे से उन नौजवानों का जवाब था कि यहाँ पढ़े-लिखे अफसरों का कैडर कैंप चल रहा है और कैडर कैंप में केवल आई.पी.एस, आई.ए.एस, आई.ऍफ़.एस और आई.एस.आर से संबंधित अफसर ही हैं. इन सभी अफसरान की पंजाब एक कांशी राम नमक व्यक्ति ने क्लास ले रखी है मतलब वह उन अफसरों को पढ़ा रहा है. सर्वे कर रही डॉक्टरों की टीम ने दांतों तले उंगलियाँ दबाते जिज्ञासा प्रकट करते खुद ही से सवाल किया कि आई.पी.एस, आई.ए.एस, आई.ऍफ़.एस और आई.एस.आर जैसे अफसर तो खुद ही योग्यता का शीर्ष होते हैं! आखिर यह कैसा शख्स है जो सरकारों का प्रबंध चलाने वाले अफसरों की ही क्लास ले रहा है? उनके मन में एक सवाल यह भी उठा कि जो इतने बड़े अफसरों की क्लास ले रहा है वह खुद कितना पढ़ा-लिखा होगा? आखिर डॉक्टरों की वह सर्वे करने वाली टीम ने इस सवाल का जवाब लेने के लिए कांशी राम को मिलने का फैसला किया. कैडर कैंप के दौरान जब टी-ब्रेक हुआ तो साहेब कुछ समय के लिए हाल से बाहर आये. डॉक्टरों की टीम ने साहब का बाहर निकलते स्वागत किया और उनसे पूछ लिया- आपकी खुद की योग्यता क्या है? तो साहेब यह कहते हुए आगे बढ़ गए कि- पहली बात तो मेरी कोई योग्यता ही नहीं है. मैं पढ़े-लिखे लोगों को पढ़ता हूँ बस यही मेरी योग्यता है. इसी तरह का ही एक वाक्य 1980 में दिल्ली में हुआ. टेंट लगे हुए थे जिनमें कुछ डॉक्टर, वकील और अफसर लोग रह रहे थे. जब साहेब ने उस टेंट की और राउंड लगाया तो किसी का मुंह पान से भरा था और किसी ने सिगरेट तो किसी ने शराब पी रखी थी. सभी जन एक दुसरे से इस बात पर झेंपते हुए कि कहीं मुंह से बास न आ जाये, एक दुसरे से इशारों-इशारों में कह रहे थे कि ‘तू साहेब की योग्यता पूछ’ ‘तू पूछ’. आखिर बामसेफ के एक कार्यकर्ता ने होंसला कर साहेब से पूछ ही लिया कि what is your Qualificatin? (आपकी योग्यता क्या है?) तो साहेब का वही जवाब था कि मैं पढ़े लिखे लोगों को पढ़ाता हूँ. जवाब सुनकर सभी के जुबान को जैसे ताला लग गया. * मैं दुसरे दलों की तरह तालमेल की आदत नहीं डालना चाहता । कयोंकि उनका तालमेल किए बिना काम नहीं चलता -साहेब कांशी राम. copy to watsapp ( " मैं कांशी राम बोल रहा हूँ " किताब लेने के लिए 9501143755 से संपर्क करें )

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