सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

मई, 2021 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं
आर.पी.आई. वाले तो चुनावों में खड़े होने के भी पैसे लेते हैं, और बैठने के भी --साहेब कांशी राम. //////////////////////////////////////// बंगा --नवांशहर ( पंमी लालोमज़ारा ) पंजाब :- बात 1971 की है. साहेब जालंधर संसदीय सीट से आर.पी.आई. के हाथी के चुनाव निशान से चुनाव लड़ रहे (फिल्लौर के नज़दीक एक गाँव) एक व्यक्ति की मदद करने के लिए पुणे से एक हज़ार रुपये सहायता फण्ड लेकर पहुंचे. साहेब दोआबा (पंजाब के एक क्षेत्रीय भाग) के उस ‘अम्बेडकरवादी लेखक’ को साथ लेकर जाना चाहते थे जिसने 1985 के पंजाब विधान सभा चुनावों में साहेब को एक पम्फलेट के माध्यम से जी भरकर निंदा प्रचार करने की कोशिश की थी. दूसरी बात, इस लेखक व्यक्ति की एक बुरी बात तब सामने आई जब साहेब अप्रैल 1985 में इंग्लैंड के दौरे पर गए थे तो इस इंसान ने इंग्लैंड की अम्बेडकरवादी संस्थाओं और अन्य जथेबंदियों को चिट्ठियां लिखकर साहेब के इंग्लैंड पहुँचने से पहले ही, उनके कान भरने की कोशिश की कि कांशी राम इंग्लैंड से पैसा एकत्रित करने आ रहा है, और उसे कोई पैसा न दिया जाये. जबकि साहेब ने इंग्लैंड के फ़क़ीर चंद चौहान (साहेब को स्पोंसर करने वाला व्यक्त...

अंबेडकरवादी 4 तरह के होते हैं -साहिब कांशी राम

अंबेडकरवादी 4 तरह के होते हैं -साहिब कांशी राम बंगा- नवांशहर (पंमी लालो मजारा) पंजाब :- * हरिजन अंबेडकरवादी। * ब्राह्मणवादी अंबेडकरवादी। * बिकाऊ अंबेडकरवादी। *टिकाऊ अंबेडकरवादी । 1-हरिजन अंबेडकरवादी - ऐसा अंबेडकरवादी बार-बार हरिजनों के ऊपर अत्याचार या बार-बार बलात्कार की बातें तो मस्का लगा लगा कर करेगा। पर जब कहीं समाज को उसके सहयोग की जरूरत महसूस होगी तो वह उनके साथ खड़ा हुआ नजर आएगा जिनके साथ उसका लेनदेन हुआ होता है। 2 .ब्राह्मणवादी अंबेडकर वादी- ऐसा अंबेडकर वादी मंच से ब्राह्मणवाद तथा रामायण, गीता और महाभारत की खूब धज्जियां उड़ाएगा। पर घर पहुंचते ही घरवाली को साथ लेकर घंटों हाथों में घंटियां पकड़ कर बजाता हुआ, नायक पूजा करता हुआ नजर आएगा। 3- बिकाऊ अंबेडकरवादी - इस तरह का अंबेडकरवादी बाबा साहेब की जयंती भी मनाता है और परिनिर्वाण दिवस भी। उसका मंच हमेशा दूसरों के लिए खुला रहता है । मतलब कि कोई भी उसके मंच को अपने हितों के लिए इस्तेमाल कर सकता है। बदले में उसको मंच पर कुर्सी जरूर मिलनी चाहिए और साथ ही उसकी जेब गर्म होनी चाहिए। 4- टिकाऊ अंबेडकरवादी - ऐसे अंबेडक...

भारत में मजदूरों की लड़ाई का श्रेय किसको जाता है ?

आज दुनिया भर में मजदूर दिवस मनाया जा रहा है। 1 मई को दुनिया मेहनतकश तबके की मेहनत को सलाम करती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में मजदूरों की लड़ाई का श्रेय किसको जाता है वह कौन है जिसने मजदूरों के काम के घंटों से लेकर इंश्योरेंस की लड़ाई लड़ी ! जवाब है डॉक्टर बी आर अंबेडकर आइए आपको बताते हैं कि बाबा साहब ने मजदूर वर्ग के लिए क्या कुछ किया *आज भारत में काम के 8 घंटे हैं तो इसका श्रेय बाबा साहब को ही जाता है 27 नवंबर 1942 को हुई सातवीं लेबर कॉन्फ्रेंस में बाबासाहेब ने काम के घंटे 14 से घटाकर आठ कर दिए उससे पहले भारत में मजदूरों को 14 से 15 घंटे काम करना पड़ता था। बिल पेश करते हुए बाबा साहब ने कहा था काम के घंटे घटाने का मतलब है रोजगार का बढ़ना लेकिन काम का समय 12 से 8 घंटे किए जाते समय वेतन काम नहीं किया जाना चाहिए(27 नवंबर 1942) • मजदूरों को दुर्घटना बीमा दिया • प्रोविडेंट फंड • टीए और डीए •मेडिकल लीव जैसे बेनिफिट्स भी दिलाऐ। बाबासाहेब ने मजदूरों की भलाई के लिए खुद 10 बिल ड्राफ्ट किए। उन्होंने: °द कूल साइंस सेफ्टी (स्टाॅविंग) बिल °द फैक्ट्री (अमेंडमेंट) बिल °द फैक्ट्रीज (...