सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

History in 30 April


. . . . . . . . . इतिहास में 30 अप्रैल . . . . . . . . . .
- - - - - - -*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-*-* - - - - - - - - -
आज के दिन यानि 30 अप्रैल 1030 को गजनी के सुलतान महमूद गजनवी का निधन हुआ था। महमूद गजनवी ने 971 से 1030 AD तक शासन किया। वह सुबक्त्गीन का पुत्र था। भारत की  धन-संपत्ति से आकर्षित होकर, गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया। उसके आक्रमण का मुख्य मकसद भारत की संपत्ति को लूटना था। साल 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया था। अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में लिखा है कि गजनवी ने करीब 5 हजार साथियों के साथ इस मंदिर पर हमला किया था। इस हमले में गजनवी ने मंदिर की संपत्ति लूटी और हमले में हजारों लोग भी मारे गए थे। कहा जाता है कि लाखों यात्री हर वर्ष इस मंदिर के दर्शन करने के लिए इकट्ठा होते थे। यहां सैंकड़ों देवदासियां रखी हुई थीं। इस मंदिर की लूट से महमूद गजनवी को लगभग दो करोड़ दीनार प्राप्त हुए।

इसके अलावा महमूद गजनवी के बारे में Mr Yadunandan Lal Lodhi का लिखा हुआ एक आर्टिकल प्रस्तुत करता हूँ। उम्मीद है आपको अच्छा लगेगा।
महमूद गजनवी ने सोमनाथ का मंदिर नहीं तोड़ा था बल्कि इस देश के ब्राह्मणवादी और मनुवादियों का गुरुर भी तोड़ा था। कहा जाता है इसी सोमनाथ मंदिर जिस पर पिछले समय बोर्ड लगाया कि हरिजनों का मन्दिर में आना मना है इसी मंदिर को 17 बार तोड़ा गया था। सबसे अधिक नुकसान मुगलों ने इस मंदिर को पहुचाया था। लेकिन इतनी बार हमले क्यों किये गए? आपको जो भी इतिहास की जानकारी जरूरी नहीं वह पूर्ण ही हो। कृष्ण के समय में भी मन्दिर को तोड़ने की बातें कही जाती हैं और उन्होंने इसे सोने, चांदी और अष्टधातुओं से निर्मित किया था। मुगलकाल में इसके द्वार इतने मजबूत माने जाते थे कि हाथियों से भी नहीं तोड़े जा सकते थे। फिर वो कौन लोग थे जिन्होंने गजनवी को इस गुप्त रहस्य की जानकारी दी और मन्दिर के ऊपर लगे ध्वज को झुकाकर गजनवी की जीत सुनिश्चित की?

गजनवी का ज़हूर एक ऐसे समुद्री तूफ़ान की तरह था जो अपनी राह में मौजूद हर मौज को अपनी आगोश में ले लेती है। वह ऐसा फातेह था जिसकी तलवार की आवाज़ कभी तुर्किस्तान से आती तो कभी हिंदुस्तान से आती। उसके कभी न् थकने वाले घोड़े कभी सिंध का पानी पी रहे होते तो कुछ ही लम्हो बाद गांगा की मौजों से अटखेलियां करते। वह उन मुसाफिरों में से था जिसने अपनी मंजिल तय नहीं की थी, और हर मंजिल से आगे गुजर जाता रहा। उसे फ़तेह का नशा था। जीतना उसकी आदत थी। वह इसी आदत की वजह से अपने परचम को खानाबदोश की तरह लिए फिरता रहा और जीतता गया।

महमूद गजनवी को राजा नन्दपाल की मौत की खबर मिल चुकी। अब ग़ज़नवी की फौज नन्दना के किले को फ़तेह करने के लिए बेताब थी। इधर तिर्लोचन पाल को राज़ा घोषित करके गद्दी सौंप दी गयी। त्रिलोचन पाल को जब ग़ज़नवी की फौजों की पेश कदमी की खबर मिली तो उसने किले की हिफाज़त अपने बेटे भीम पाल को सौंप दी। भीम पाल की फ़ौज गज़नबी के आगे एक दिन भी न ठहर सकी। उधर कश्मीर में तिरलोचन ने झेलम के शुमाल में एक फ़ौज को मुनज्जम किया जो एक सिकश्त खोरदा लश्कर साबित हुई।

रणवीर एक राजपूत सरदार का बेटा था जो भीम सिंह से साथ नन्दना के किले पर अपनी टुकड़ी की क़यादत कर रहा था। रणवीर बहुत बहादुरी से लड़ा और यहाँ तक कि उसके जौहर देख कर गज़नबी मुतास्सिर हुए बिना न् रह सका। वह तब तक अकेला ग़ज़नवी के लश्कर को रोके रहा जब तक उसके पैरों में खड़े रहने की ताकत थी। उसके बाद ज़मीन पर गिर कर बेहोश हो गया। आँखें खोली तो गज़नबी के तबीब उसकी मरहम पट्टी कर रहे थे। रणवीर ने गज़नबी के मुताल्लिक बड़ा डरावनी और वहशत की कहानियां सुनी थीं, लेकिन यह जो हुस्ने सुलूक उसके साथ हो रहा था, उसने कभी किसी हिन्दू राज़ा को युद्ध बंदियों के साथ करते नहीं देखा। उसे लगा कि शायद धर्म परिवर्तन करने के लिए बोला जायेगा और तब तक अच्छा सुलूक होगा। मना करने पर यह मुस्लिम फ़ौज उसे अज़ीयत देगी। उसने इस खदशे का इज़हार महमूद से कर ही दिया, कि अगर तुम क़त्ल करना चाहते हो तो शौक से करो पर मैं धर्म नहीं बदलूंगा। उसके जवाब में ग़ज़नवी के होंठों पर बस एक शांत मुस्कराहट थी, गज़नबी चला गया।

रणवीर के जखम तेज़ी से भर रहे थे। वह नन्दना के किले का कैदी था पर न् उसे बेड़ियां पहनाई गयी और न् ही किसी कोठरी में बंद किया गया। कुछ वक़्त गुजरने के साथ ही कैदियों की एक टुकड़ी को रिहा किया गया जिसमें रणबीर भी था। रिहाई की शर्त बस एक हदफ़ था कि वह अब कभी गज़नबी के मद्दे मुकाबिल नहीं आएंगे, यह तिर्लोचन पाल के सैनिकों के लिए चमत्कार या हैरानी की बात थी। उन्हें यक़ीन करना मुश्किल था। खैर रणवीर जब अपने घर पहुंचा तो उसे उम्मीद थी कि उसकी इकलौती बहन सरला देवी उसका इस्तकबाल करेगी और भाई की आमद पर फुले नही समाएगी, पर घर पर दस्तक देने बाद भी जब दरवाज़ा नहीं खुला तो उसे अहसास हुआ कि दरवाज़ा बाहर से बंद है, उसे लगा बहन यहीं पड़ोस में होगी। वह पड़ोस के चाचा के घर गया तो उसने जो सुना उसे सुन कर वह वहशीपन की हद तक गमो गुस्से से भर गया।

उसकी बहन को मंदिर के महाजन के साथ कुछ लोग उठा कर ले गए। चाचा बड़े फ़ख्र से बता रहा था कि, रणवीर खुश किस्मत हो जो तुम्हारी बहन को महादेव की सेवा करने का मौका मिला है, लेकिन यह लफ्ज़ रणवीर को मुतास्सिर न् कर सके। रणबीर चिल्लाया कि किसके आदेश से उठाया। चाचा बोले, पुरोहित बता रहा था कि सोमनाथ से आदेश आया है कि हर गाँव से तीन लड़कियां देव दासी के तौर पर सेवा करने जाएंगी, हमारे गाँव से भी सरला के साथ दो और लड़कियां ले जाई गयी हैं। रणवीर खुद को असहाय महसूस कर रहा था। कहीं से उम्मीद नज़र नहीं आ रही थी। ज़हनी कैफियत यह थी कि गमो गुस्से से पागल हो गया था। वह सोच रहा कि वह एक ऐसे राज़ा और उसका राज़ बचाने के लिए जान हथेली पर लिए फिर रहा था, और जब वह जंग में था तो उसी राज़ा के सिपाही उसकी बहन को पुरोहित के आदेश पर उठा ले गए। उसने सोचा कि राज़ा से फ़रयाद करेगा, अपनी वफादारी का हवाला देगा, नहीं तो एहतिजाज करेगा। चाचा से उसने अपने जज़्बात का इजहार किया, चाचा ने उसे समझाया कि अगर ऐसा किया तो धर्म विरोधी समझे जाओगे और इसका अंजाम मौत है।

उसे एक ही सूरत नज़र आ रही थी कि वह अपने दुश्मन ग़ज़नवी से अपनी बहन की इज़्ज़त की गुहार लगायेगा। लेकिन फिर सोचने लगता कि ग़ज़नवी क्यू उसके लिए जंग करेगा, उसे उसकी बहन की इज़्ज़त से क्या उज्र, वह एक विदेशी है और उसका धर्म भी अलग है लेकिन रणवीर की अंतरात्मा से आवाज़ आती कि उसने तुझे अमान दी थी, वह आबरू की हिफाज़त करेगा, और बहन के लिए न् सही पर एक औरत की अस्मिता पर शायद अमल करेगा। रणवीर घोड़े पर सवार हो उल्टा सरपट दौड़ गया। इधर सोमनाथ में सालाना इज़लास चल रहा था। इस सालाना इज़लास में सारे राज़ा और अधिकारी गुजरात के सोमनाथ में जमा होते। जो लड़कियां देवदासी के तौर पर लायी जातीं उनको पहले से डांस की ट्रेनिंग दी जाती। जो लड़की पहले स्थान पर आती उस पर सोमनाथ के बड़े भगवान का हक़ माना जाता। बाकी लड़कियां छोटे बड़े साधुओं की खिदमत करने को रहतीं और अपनी बारी का इंतज़ार करतीं, उन सभी लड़कियों को कहा जाता कि साज़ श्रृंगार और नाज़ो अदा सीखें, जिससे भगवान को रिझा सकें।

एक दिन ऐसा आता कि जितने वाली लड़की को कहा जाता कि आज उसे भगवान् ने भोग विलास के लिए बुलाया है। उसके बाद वह लड़की कभी नज़र नहीं आती। ऐसी कहानियां बनाई गईं कि महादेव उस लड़की को अपने साथ ले गए और अब वह उनकी पटरानी बन चुकी है। यह बातें रणवीर को पता थीं। उसकी सोच सोच कर जिस्मानी ताक़त भी सल हो गयी थी, ताहम उसका घोड़ा अपनी रफ़्तार से दौड़ रहा था। ग़ज़नवी से मिल कर उसने अपनी रूदाद बताई। एक गैरत मन्द कौम के बेटे को किसी औरत की आबरू से बड़ी और क्या चीज़ हो सकती थी। वह हिंदुत्व या सनातन को नहीं जानता था। उसे पता भी नहीं था कि यह कोई धर्म भी है। उसके लिए अब तक केवल दौलत मायने रखती थी और जब परिचय ही नहीं था तो द्वेष का तो सवाल ही नहीं था, हाँ उसके लिए बात सिर्फ इतनी थी कि एक बहादुर सिपाही की मज़लूम तनहा बहन को कुछ पाखंडी उठा ले गए हैं और उसका भाई उससे मदद की गुहार लगा रहा है। वह गैरत मन्द सालार अपने दिल ही दिल में अहद कर लिया कि एक भाई की बहन को आज़ाद कराने के लिए वह अपने आखरी सिपाही तक जंग करेगा।

ग़ज़नवी जिसके घोड़ों को हर वक़्त जीन पहने रहने की आदत हो चुकी थी, और हर वक़्त दौड़ लगाने के लिए आतुर रहते, वह जानते थे कि सालार की बेशतर जिंदगी आलीशान खेमों और महलों में नहीं बल्कि घोड़े की पीठ पर गुजरी है, गज़नबी ने फ़ौज को सोमनाथ की तरफ कूच का हुक्म दिया। इधर पुरोहितों ने समाज मे सदियों से यह अफवाह बनाई हुई थी कि सोमनाथ की तरफ देखने वाला जल कर भस्म हो जाता है, और गज़नबी की मौत अब निश्चित है, वह मंदिर क्या शहर में घुसने से पहले ही दिव्य शक्ति से तबाह हो जायेगा , अफवाह ही पाखंड का आधार होती है, गज़नबी अब मंदिर परिसर में खड़ा था, बड़े छोटे सब पुरोहित बंधे पड़े थे, राजाओं और उनकी फ़ौज की लाशें पुरे शहर में फैली पड़ीं थीं जिन्हें चील कवे खा रहे थे, और सोमनाथ का बुत टूट कर कुछ पत्थर नुमा टुकड़ों में तब्दील हो गया था, दरअसल सबसे बड़ी मौत तो पाखंड रूपी डर की हुई थी।

कमरों की तलाशी ली जा रही थी जिनमें हज़ारों हज़ार जवान और नौ उम्र लडकियां बुरी हालत में बंदी पायी गईं, वह लड़कियां जो भगवान के पास चली जाती और कभी नहीं आती, पूछने पर पता चला कि जब बड़े पुरोहित के शोषण से गर्भवती हो जातीं तो यह ढोंग करके कत्ल करदी जाती, इस बात को कभी नहीं खोलतीं क्योंकि धर्म का आडंबर इतना बड़ा था कि यह इलज़ाम लगाने पर हर कोई उन लड़कियों को ही पापी समझता। महमूद ने जब अपनी आँखों से यह देखा तो हैरान परेशान, और बे यकीनी हालात देख कर तमतमा उठा , रणवीर जो कि अपनी बहन को पा कर बेहद खुश था, उससे गज़नबी ने पुछा कि क्या देवदासियां सिर्फ यहीं हैं, रणवीर ने बताया कि ऐसा हर प्रांत में एक मंदिर है। उसके बाद गज़नबी जितना दौड़ सकता था दौड़ा, और ब्राह्मणवादी जुल्म, उनके बुत कदों को ढहाता चला गया, पूरे भारत में न् कोई उसकी रफ़्तार का सानी था, और न् कोई उसके हमले की ताब झेल सकता था।

सोमनाथ को तोड़ कर अब वह यहाँ के लोगों की नज़र में खुद एक आडंबर बन चुका था, दबे कुचले मज़लूम लोग उसे अवतार मान रहे थे। गज़नबी ने जब यह देखा तो तौहीद की दावत दी। वह जहाँ गया वहां प्रताड़ित समाज स्वेच्छा से भी मुसलमान होने लगे और यकीनन जिनसे संघर्ष हुआ उनके साथ मारकाट भी हुई। उसकी फ़ौज में आधे के लगभग हिन्दू धर्म के लोग थे जो उसका समर्थन कर रहे थे। उसकी तलवार ने आडंबर, ज़ुल्म और पाखंड को फ़तेह किया तो उसके किरदार ने दिलों को भी फ़तेह किया। वह् अपने जीते हुए इलाके का इक़तिदार मज़लूम कौम के प्रतिनिधि को देता गया और खुद कहीं नहीं ठहरा। (Information source reference : Book , मुजाहिद का आखरी मारिका)

अब आप समझ लीजिए कि इतिहासकारों क्या लिखना था वह आप खुद से पूछिए कि आप क्या जानते हैं? ऐसा बिल्कुल नहीं कि महमुद गजनवी कोई फरिश्ता था। लेकिन हां भारतीय व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए और कुछ लोगों की नीति और नियति को खत्म करने के लिए वह राक्षस जरूर बनाया गया। इतिहास को समझना है तो आज की स्थिति को भी जानना होगा। मन्दिर के बाहर बोर्ड लगाना, मन्दिर में आज भी देवदासियां होना तथा बहुत बड़ा वर्ग आज भी इस व्यवस्था का समर्थक और इसे धर्म मानता हुआ मिल जाये तो यकीनन आप आने वाले समय में किसी अन्य महमूद गजनवी के लिए आधार तैयार कर रहे हैं।

आज ही के दिन यानि 30 अप्रैल 1837 को सिक्खों के प्रमुख जरनैल सरदार हरी सिंह नलवा की अफगानिस्तान के किला जमरौद में मौत हुई थी। ये सच है कि उनकी मौत हिंदू डोगरों की साजिश के कारण हुई। डोगरे नहीं चाहते थे कि सिक्ख राज सही सलामत चलता रहे। हरी सिंह नलवा सिक्ख राज का एक मजबूत सतंभ था। जांबाज और कभी काबू में न आने वाले अफगानी लोगों को उसी ने काबू किया था। हरी सिंह की मौत के बाद सिक्ख राज कमजोर हो गया। फिर इसके दो साल बाद ही महाराजा रणजीत सिंह की मौत हो गई। उसके बाद पंजाब में साजिशें शुरू हो गईं और अंग्रेज आ कर काबिज हो गए। सरदार हरी सिंह नलवा की बहादुरी और सूझबूझ का अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि जिस अफगानिस्तान में सोवियत रूस की सेना फेल हो गई, जहां अमेरिका की सेना को हार मानकर भागना पड़ा वहां सरदार हरी सिंह नलवा ने धड़ल्ले से हकूमत चलाकर दिखाई।
                            दर्शन सिंह बाजवा
                        संपादक अंबेडकरी दीप

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

Celebrating Dr. Ambedkar's Birthday

  On April 13, 2023, the birthday of Dr. Bhimrao Ambedkar was celebrated with great enthusiasm at the Bhim Rao Ambedkar Social Educational and Welfare Club Bhasaur (Reg. DIC/DRA 14119 OF 2019) in the village of Bhasaur. This event is commemorated annually, and its focus is to inspire children towards education. The program was graced by the presence of Dr. Makhan Singh, a retired Deputy Director from the Health Department of Punjab, who attended as the chief guest. Additionally, Sardar Pavitar Singh, the former District BSP President Sangrur, Sardar Amrik Singh Kanth, the District BSP President Sangrur, Malvinder Singh, the Halka Dhuri BSP President, and Principal Gurbakhsh Singh Ji were present at the event. The speakers at the program informed the audience about Dr. Bhimrao Ambedkar's ideology and the significant works he accomplished during his lifetime. Singer Preet Kaur Dhuri captivated everyone's attention with her beautiful songs, while the children's performances ad...

Higher education importance

  Higher education is crucial for personal growth, career advancement, and the overall development of society. Here are some reasons why higher education is important: Enhances Personal Growth: Higher education exposes students to a wide range of subjects, ideas, and perspectives. It provides an opportunity to develop critical thinking, problem-solving, and communication skills, which are essential for personal growth. Career Advancement: Higher education provides individuals with the knowledge and skills required to excel in their chosen fields. It opens up job opportunities, increases earning potential, and enhances career advancement. Improves Societal Development: Higher education contributes to the development of society by producing professionals who have the necessary skills and knowledge to tackle complex societal problems. It also promotes innovation, research, and development, which leads to the advancement of society. Provides Networking Opportunities: Higher education p...

DOOR EYE Mortise Door Handle Set with Lock Body 3 Keys Lock, Bathroom, Bedroom, Living Room Finish Black/Gold Size 7”(ky) (IMH 8007)

  https://amzn.to/3BltMri